Mutual Funds में Lock in क्या होता है?

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Mutual Funds में Lock in का सीधा सा मतलब है वो अवधि जिसमे हम अपना invest किया हुआ पैसा नहीं निकाल सकते. Mutual Funds के हर एक fund में lock-in का समय पहले से निर्धारित होता है और invest करने से पहले हमे इसके बारे में पूरी जानकारी ले लेनी चाहिए.

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Mutual Funds का Equity Linked Savings Scheme (ELSS) इसका सबसे अच्छा उदाहरण है. ELSS में तीन साल का अनिवार्य Lock In होता है. इसके बाद ही आप अपने पैसे को निकाल सकते है, या किसी और fund में reinvest कर सकते हैं.

Mutual Funds में Lock In क्यों जरुरी है?


Liquidity का इस्तेमाल अगर सही से न किया जाए तो ये नुकसान भी पहुँचा सकती है.
Mutual Funds में Liquidity बहुत ज़्यादा होती है. इसका मतलब आप इसे कभी भी ख़रीद या बेच सकते हैं. Mutual Funds में कई सारे investors से छोटी -छोटी investments को लेकर एक बड़ा amount बनाया जाता है. उस बड़े amount को एक तय समय के लिए कहीं पर invest किया जाता है. अब अगर liquidity का फायदा उठाकर investors बहुत ज़ल्दी – ज़ल्दी funds को बेचेंगे तो इससे investment पर कई गलत प्रभाव पड़ेगा. इससे investment पर अच्छे returns पाने में भी मुश्किल हो सकती है.
इसी को रोकने के लिए Mutual Funds में Lock in और Exit Load लगाया जाता है.

Lock In से जुड़े कुछ सवाल

Lock In में investor क्या नहीं सकते?
इसमें investor अपने investments या पैसे को redeem/withdraw या switch नहीं कर सकते.

क्या सभी funds में Lock In होता है?
नहीं ज़्यादार debt funds में कोई Lock In नहीं होता. ये ज्यादातर equity funds में ही होता है.

Lock In के दौरान क्या SIP रोक सकता हूँ?
हाँ, आप अपनी SIP कभी भी रोक सकते हैं. Lock In का इसपर कोई फ़र्क नहीं पड़ता.