Mutual Funds में Liquidity क्या होती है और ये क्यों जरुरी है?

liquidity in mutual funds

Liquidity को समझने के लिए हम एक छोटा सा example लेते हैं. मान लीजिए आपके पास गाँव में एक घर है. गाँव में किसी property या घर को बेचना आसान नहीं होता. अब अगर यही property या घर किसी बड़े शहर में हो तो उसे आसानी से बेचा जा सकता है. मतलब शहर के property कि Liquidity गाँव के property से ज़्यादा है.
इसका मतलब किसी भी property या investment को कितनी आसानी से ख़रीदा या बेचा जा सकता है, उसे ही investment या property कि Liquidity कहते हैं.

सबसे आसान शब्दों में समझाने का प्रयास ऐसे कर सकते हैं.अगर किसी asset को आसानी से ख़रीदा या बेचा जा सकता है तो इसका मतलब उसमे Liquidity है.
Liquidity का हिंदी में शाब्दिक मतलब है तरलता, या इस संदर्भ में पैसों की तरलता.

Investment या Asset की Liquidity

हर एक asset कि Liquidity अलग होती है. सबसे ज़्यादा liquidity वाला asset cash या नगदी होता है. cash के बाद नंबर आता है Gold का, क्योंकि गोल्ड को भी बहुत ही आसानी से ख़रीदा या बेचा जा सकता है. इसके बाद सबसे ज़्यादा liquidity stocks या Mutual Funds की होती है.

Stocks के बाद नंबर आता है किसी property का. किसी भी property जैसे घर या जमीन को बेचना थोड़ा कठिन हो सकता है. इसलिए इसकी liquidity सबसे कम होती है.

Investment में Liquidity जरुरी क्यों होती है?

  • जब liquidity ज़्यादा होती है तब किसी भी investment को आसानी से ख़रीदा या बेचा जा सकता है. इस फ़ायदे कि वज़ह से ग्राहक आसानी मिल जाते हैं.
  • Investment में liquidity होने कि वजह से कोई भी उसे एक सही दाम (fair price ) पर ख़रीद या बेच सकता है.
  • Liquidity ज़्यादा होने पर आपको ग्राहक खोजने की जरुरत नहीं पड़ती.

Mutual Funds में Liquidity बहुत ज़्यादा होती है. इसीलिए आप इसको कभी भी ख़रीद या बेच सकते हैं. इसी वजह से आज Mutual Funds market में investment करने का एक बहुत अच्छा विकल्प माना गया है.

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