Debt Mutual Funds कितने प्रकार के होते हैं?

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Debt Funds, Mutual Funds में निवेश करने का एक काफ़ी सुरक्षित तरीका माना गया है. इसमें risk बहुत कम और interest, bank FD की अपेक्षा में काफी अच्छे होते हैं. इसके साथ साथ Debt Funds में निवेश करने के लिए investors के पास कई सारे options हैं. यहाँ पर options का मतलब है कि Debt Mutual Funds कई प्रकार के होते हैं. और कोई भी investor अपने Financial Goals को ध्यान में रखकर उनमे से सबसे सही fund चुन सकता है.

Debt Fund में पैसा कहाँ invest हो रहा है और कितने समय के लिए invest हो रहा है, इनको ध्यान में रखकर हम Debt Mutual Funds को  मुख्यतः दो categories में बाँट सकते हैं.

  1. Maturity के आधार पर.
  2. किस सेक्टर में invest हो रहा के आधार पर

Debt Funds के कुछ प्रकार जो कि उनकी maturity (अवधि) को ध्यान में रखकर बनाये गए हैं. ये funds Debt Securities में पैसे को invest करते हैं.

  • Overnight Funds: ऐसे Funds जिनकी maturity एक दिन कि होती है.
  • Liquid Funds : इन Funds कि maturity 90 से 91 दिन की होती है.
  • Ultra-Short Duration Funds: 3 से 6 महीने की maturity वाले funds  Ultra-Short Duration Funds कहे जाते हैं.
  • Low Duration Fund: ऐसे Funds जिनकी maturity 6-12 महीने की होती है.
  • Money Market Fund: एक साल की maturity वाले funds जो money market में invest करते हैं.
  • Short Duration Funds: ऐसे फंड्स जिनकी maturity अवधि 1 – 3 साल की हो.
  • Medium Duration Funds: 3 से 4 साल की maturity वाले funds Medium Duration Funds कहे जाते हैं.
  • Medium to Long Duration Fund: 4  से 7  साल की maturity वाले funds Medium to Long Duration Fund कहे जाते हैं.
  • Long-Duration Funds : सबसे ज़्यादा समय की maturity वाले debt funds जिनकी अवधि लगभग 7 साल की होती है.

Debt Mutual Funds में पैसे किस sector में invest हो रहे हैं, आधार पर Debt Funds को नीचे दिए गए categories में बाँट सकते हैं.

  • Gilt Funds: इन funds का लगभग 80 प्रतिशत पैसा government द्वारा जारी किये गए bonds में किया में किया जाता है.
  • Corporate Bonds Funds : इन funds का लगभग 80 प्रतिशत पैसाcorporates द्वारा जारी किये गए bonds में किया में किया जाता है.
  • Banking & PSU Fund: अपने नाम के अनुसार ही इन funds का पैसा Banking और PSU सेक्टर में किया जाता है |

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